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Monday, 25 April 2016

गांवों में 1400 हैंडपंपों ने दम तोड़ा, मई में शहर पर भी संकट की आहट

गांवों में 1400 हैंडपंपों ने दम तोड़ा, मई में शहर पर भी संकट की आहट
गांवों में 1400 हैंडपंपों ने दम तोड़ा, मई में शहर पर भी संकट की आहट
जिले के अधिकांश गांवों में पेयजल का जरिया हैंडपंप ही हैं, लेकिन भूमिगत जल स्तर गिरने से लगभग 1400 हैंडपंप दम तोड़ चुके हैं। शहर में नर्मदा जल से काम चल रहा है। जिन इलाकों में ट्यूबवेल से सप्लाई है, वहां मई में संकट आ सकता है।
शहर में 5500 ट्यूबवेल हैं। इनसे 60 एमएलडी पानी मिलता है। कई जगह जलस्तर गिरने से इनमें पानी कम होता जा रहा है। शहर के 46 प्रतिशत हिस्से में ही पाइप लाइन बिछी है। बाकी हिस्से में पानी की सप्लाई के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। निगम के पास खुद के 52 टैंकर हैं। बढ़ती गर्मी को देखते हुए 108 अतिरिक्त टैंकर किराए पर लगा रखे हैं। इस तरह पूरे शहर में 160 टैंकर चल रहे हैं। देखा जाए तो एक वार्ड में औसतन दो टैंकर चल रहे हैं।

Tuesday, 22 March 2016

राजधानी के उद्योग और खेती इलाके का भूमिजल पीने के लायक नहीं

राजधानी के उद्योग और खेती इलाके का भूमिजल पीने के लायक नहीं
राजधानी के उद्योग और खेती इलाके का भूमिजल पीने के लायक नहीं
रायपुर के औद्योगिक इलाके उरला और खेतीबाड़ी वाले क्षेत्र भाटागांव का भूजल पीने के लायक नहीं है। भाटागांव के भूमिजल में जहां 60 फीसदी से अधिक सैंपल में लवणता मानक से अधिक मिली है वहीं औद्योगिक इलाके उरला के भूमि जल में खनिज खुलने से पानी के खारेपन और टीडीएस यानी कुल घुलित ठोस की मात्रा अधिक है।
यह दावा किया जा रहा है पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के भूगोल अध्ययनशाला की ओर से किए गए अध्ययन में। अनुसंधानकर्ता डॉ. केएन प्रसाद, डॉ.एनके बाघमार, डॉ. दुर्गापद कुइति और शोधार्थी संजीव प्रमानिक के इस शोध का प्रकाशन हाल ही में जनरल ऑफ एप्लाइड जियोकेमेस्ट्री हैदराबाद में प्रकाशित हुआ है।