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Wednesday, 29 June 2016

रायपुर में राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण नीति होगी लांच

देश की राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण नीति छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में लांच होगी। 4 व 5 जुलाई को केंद्रीय खान मंत्रालय के अफसर, खनिज उत्पादक बारह राज्यों के खनिज मंत्री, सचिव सहित निवेशक, खनन कंपनियों के प्रतिनिधि, शिक्षा व अर्थशास्त्री जुटेंगे। पूरे देश में पहली बार छत्तीसगढ़ में खनन व खनिज पर राष्ट्रीय स्तर का सम्मलेन किया जा रहा है।
केंद्रीय खनन मंत्रालय व छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से आयोजित इस सम्मेलन में खनन व खनिज क्षेत्र से जुड़े लगभग चार सौ लोग हिस्सा लेंगे। केंद्र सरकार इस सम्मेलन में नई खनन खोज नीति, राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण नीति, खनिज पट्टों के आवंटन की नीति तथा परमाणु खनिज नियम लांच करेगी। नई नीति जारी होने के बाद निजी क्षेत्र को भी निवेश का मौका मिलेगा।

Friday, 27 May 2016

ढाई साल के बच्चे की श्वास नली में फंसी कील, डॉक्टर्स ने 20 मिनट में निकाली

ढाई साल के बच्चे की श्वास नली में फंसी कील, डॉक्टर्स ने 20 मिनट में निकाली
ढाई साल के बच्चे ने घर में खेलते हुए मुंह में ढाई इंच लंबी कील डाल ली। कील उसकी श्वास नली में फंस गई। घटना कोरबा जिले के रंजना गांव की है। बच्चे के माता-पिता पहले उसे एक नजदीकी अस्पताल में ले गए।
स्थानीय डॉक्टर ने जिला अस्पताल और फिर जिला अस्पताल के डॉक्टर ने उसे रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल रेफर किया। ईएनटी विभाग के डॉक्टर्स ने एक्स-रे किया।
इसमें पुष्टि हो गई कि श्वास नली में कील फंसी हुई है। डॉक्टर्स ने बगैर सर्जरी (चीरफाड़), ब्रोंकोस्कोपी तकनीक से 20 मिनट में कील निकाल दी। बच्चा अब पूरी तरह से स्वस्थ है और खतरे से बाहर भी।

Tuesday, 22 March 2016

राजधानी के उद्योग और खेती इलाके का भूमिजल पीने के लायक नहीं

राजधानी के उद्योग और खेती इलाके का भूमिजल पीने के लायक नहीं
राजधानी के उद्योग और खेती इलाके का भूमिजल पीने के लायक नहीं
रायपुर के औद्योगिक इलाके उरला और खेतीबाड़ी वाले क्षेत्र भाटागांव का भूजल पीने के लायक नहीं है। भाटागांव के भूमिजल में जहां 60 फीसदी से अधिक सैंपल में लवणता मानक से अधिक मिली है वहीं औद्योगिक इलाके उरला के भूमि जल में खनिज खुलने से पानी के खारेपन और टीडीएस यानी कुल घुलित ठोस की मात्रा अधिक है।
यह दावा किया जा रहा है पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के भूगोल अध्ययनशाला की ओर से किए गए अध्ययन में। अनुसंधानकर्ता डॉ. केएन प्रसाद, डॉ.एनके बाघमार, डॉ. दुर्गापद कुइति और शोधार्थी संजीव प्रमानिक के इस शोध का प्रकाशन हाल ही में जनरल ऑफ एप्लाइड जियोकेमेस्ट्री हैदराबाद में प्रकाशित हुआ है।