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Friday, 22 April 2016

पहले शाही स्नान के साथ सबसे बड़ा धार्मिक मेला शुरू

पहले शाही स्नान के साथ सबसे बड़ा धार्मिक मेला शुरू
पहले शाही स्नान के साथ सबसे बड़ा धार्मिक मेला शुरू
आखिर वह दिन आ ही गया, जिसका 12 सालों से इंतजार था। अमृतमयी मोक्षदायिनी शिप्रा में शुक्रवार सुबह शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती और नागा साधुओं के शाही स्नान के साथ सबसे बड़ा धार्मिक मेला शुरू हो गया। सबसे पहले पंच दशनाम जूना अखाड़ा, पंचायती आवाहन अखाड़ा और पंचायती अग्नि अखाड़े के साधु-संतों ने दत्त आखाड़ा घाट पर सुबह 6 बजे स्नान किया। इसके बाद से सभी अलग-अलग अखाड़ों का शाही स्नान क्रमानुसार हुआ।

बुधादित्य योग ने शाही स्नान को बनाया खास

ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला के अनुसार शुक्रवार सुबह 6 बजे मेष लग्न में अमृत स्नान का आरंभ हुआ। मेष राशि में सूर्य व बुध का होना, उच्च बुधादित्य योग बना रहा है। इसके साथ ही सिंह राशि में बृहस्पति व राहु का दृष्टि संबंध भी बन रहा है। यह योग धर्म व आध्यात्मिक उन्नति के लिए सबसे श्रेष्ठ है।
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Thursday, 21 April 2016

जब नागा साधुओं ने की कृष्ण की नगरी की रक्षा

जब नागा साधुओं ने की कृष्ण की नगरी की रक्षा
जब नागा साधुओं ने की कृष्ण की नगरी की रक्षा
यदि भारतीय इतिहास से जुड़ी कई किताबों के पन्ने पलटेंगे तो नागा साधुओं ने जो युद्ध धर्म और समाज के हित को ध्यान में रखकर लड़े इन सभी का जिक्र मिलता है। धर्म के इस कार्य में हजारों नागाओं ने हिस्सा लिया था। उस समय नागा साधुओं को स्थानीय राजा-महाराजाओं का समर्थन प्राप्त था।

नागा साधुओं की सबसे मुख्य लड़ाई अहमद शाह अब्दाली की लड़ाई मानी जाती है। अहमद शाह अब्दाली, जिसे अहमद शाह दुर्रानी भी कहा जाता है, सन 1748 में नादिरशाह की मौत के बाद अफगानिस्तान का शासक और दुर्रानी साम्राज्य का संस्थापक बना।

उसने भारत पर सन 1748 से सन 1758 तक कई बार चढ़ाई की। अब्दाली ने भारत पर सबसे बड़ा हमला सन् 1757 में जनवरी माह में दिल्ली पर किया। अहमदशाह एक माह तक दिल्ली में रुका और उसने लूटपाट की।