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| इसीलिए जरूरी था श्रीहरि का छल करना |
पृथ्वी और धर्म की रक्षा के लिए कभी-कभी ईश्वर को भी स्वभाव के विपरीत कार्य करने पढ़े थे। भगवान विष्णु ने ऐसे कार्य किए हैं। यदि वो उस समय ऐसे छल नहीं करते तो पृथ्वी के साथ संपूर्ण मानवजाति का अंत हो चुका होता।
भगवान शंकर ने भस्मासुर को यह वरदान दिया था कि वो जिस पर हाथ रखेगा वो भस्म हो जाएगा। लेकिन जब वह पार्वती जी पर मोहित होकर भगवान शंकर को ही भस्म करने पहुंचा तो श्री हरि ने मोहिनी रूप रख उसको नृत्य करवाया और उसका हाथ उसी के सिर पर रखवा दिया। ऐसा ही एक प्रसंग समुद्रमंथन के समय का है। इस पूरे प्रसंग का विस्तार से उल्लेख हिंदू धर्म ग्रंथों में मिलता है।
जब समुद्रमंथन से अमृतकलश निकला तो दानव और देवों ने अमृत पीने की इच्छा जाहिर की। यदि दैत्य अमृत पी लेते तो उन्हें मारना असंभव था। पृथ्वी पर अधर्म का साम्राज्य हमेशा के लिए हो जाता। तब श्री हरि ने मोहिनी का रूप रख देवताओं को छल से अमृत और दानवों को जल पिलाया।
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