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Friday, 24 June 2016

जिंदगी में समृद्धि और प्रेम के लिए करें ये 5 उपाय

फेंगशुई में घर की शांति के लिए कई टिप्स बताए गए हैं। जानकार कहते हैं कि वास्तु की तरह ही फेंगशुई से घर में शांति,सुकून का वास होता है। साथ ही कलह से मुक्ति भी मिलती है।
फेंगशुई में विंड चाइम, लॉफिंग बुद्धा, प्लास्टिक के फूल, कछुआ, जहाज, सिक्कों आदि का बहुत अधिक महत्व है। इन्हें अपने घर या कार्यस्थल में किसी निर्धारित दिशा में रखकर आप अपना व्यवसाय बढ़ा सकते हैं और शांति-सुकून भी पा सकते हैं। आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही कारगार टिप्स के बारे में।

Wednesday, 15 June 2016

ऐसे बन सकते हैं अल्लाह के नेक बंदे

बहुत समय पहले आरिफ सुभानी नाम के दरवेश हुए थे। उन्हें दुनिया की किसी भी वस्तु से मोह-माया नहीं थी। पहनने के लिए कपड़ों के अलावा उनके पास दूसरी कोई ओर चीज न थी। शांतिप्रिय और सादगीपूर्ण जीवन जीने वाले इस दरवेश का स्वभाव दूसरों से मेल भी नहीं खाता था।

आरिफ सुभानी मंदिर, मस्जिद और चर्च में कोई भेद नहीं देखते थे। एक बार उनके पास एक व्यक्ति रियाज सीखने आया। उन्होंने पूछा, क्या तुम्हें और कोई नहीं मिला? उस व्यक्ति ने कहा, आपसे ही सीखना है। यह बात सुनकर दरवेश ने कहा, यदि तुम मुस्लिम हो तो ईसाईयों के पास जाओ। अगर शिया हो तो इखराजियों( एक मुस्लिम संप्रदाय) के पास जाओ। और यदि सुन्नी हो तो ईरान जाओ।

आरिफ सुभानी की बातें सुनकर वह व्यक्ति हैरान हो गया। दरवेश ने उसकी तरफ एकटक देखा और फिर कहा, मेरे कहने का मतलब है कि तुम जिस धर्म को मानते हो, उस धर्म को न मानने वाले के पास जाओ। उनके पास जाने पर वह तेरे धर्म की निंदा करेंगे। तुम सुनते रहना। और तुम्हें इतनी सहिष्णुता आ जाए कि विरोधियों की बातों का बुरा न लगे तो तुम्हें सच्ची शांति मिलेगी। और तू खुदा के बंदों में अपना स्थान बना लेगा।

Thursday, 19 May 2016

ये अनोखी बात अभी तक थी अज्ञात

ये अनोखी बात अभी तक थी अज्ञात
ये अनोखी बात अभी तक थी अज्ञात
हिंदू पुराणों में उल्लेख मिलता है कि भगवान विष्णु यानी श्रीहरि भगवान भोलेनाथ को एक अनोखा उपहार देना चाहते थे। और यह उपहार बिना नृसिंह अवतार लिए संभव नहीं था।
नृसिंह भगवान ने हिरण्यकशिपु का वध कर दिया लेकिन उनका क्रोध शांत नहीं हो रहा था। भयभीत कर देने वाले इस स्वरूप से नृसिंह भगवान संसार का अंत करने के लिए आतुर हो रहे थे। यह भगवान नृसिंह की एक लीला थी।
इस लीला से तीनों लोक भयभीत थे। ऐसी विषम परिस्थिति देख देवता और देवगण भोलेनाथ के पास पहुंचे। तब शिव ने अपने अंश से उत्पन्न वीरभद्र से कहा कि नृसिंह क्रोध में भरकर संसार को नष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें उनके वास्तविक स्वरूप से अवगत कराएं, और उनसे निवेदन करो कि वह ऐसा न करें।
यदि वह आपका अनुरोध न मानें तो शक्ति का प्रयोग करके नृसिंह को शांत करो। वीरभद्र नृसिंह के पास पहुंचे और पहले विनित भाव से शांत करने की कोशिश करने लगे। लेकिन जब नृसिंह नहीं माने तब वीरभद्र ने शरभ रूप धारण लिया।