Naidunia Hindi News - Comprehensive, up-to-date news coverage India, World, Business, Technology, Entertainment, Sports, Science, Health and Spotlight News.
Showing posts with label Entertainment. Show all posts
Showing posts with label Entertainment. Show all posts
Thursday, 30 June 2016
VIDEO : अक्षय कुमार की फिल्म 'रुस्तम' का ट्रेलर रिलीज
Tuesday, 24 May 2016
लिसा हेडन ने 'रंगीन मिजाज' किरदार निभा किया खुद को साबित
![]() |
| लिसा हेडन ने 'रंगीन मिजाज' किरदार निभा किया खुद को साबित |
लिसा हेडन ने हाल ही में बताया कि उन्हें सबसे ज्यादा स्ट्रगल लोगों की इस सोच से करना पड़ा कि वो एक्टिंग नहीं कर सकती हैं। उन्होंने बताया कि लोगों का ऐसा मानना था कि वो एक्टिंग नहीं कर सकती हैं। लेकिन फिल्म 'क्वीन' के बाद लोगों की ये सोच बदल गई।
लिसा ने बताया कि मुझे सिर्फ एक मॉडल के रूप में देखा जाता था। लोगों को ये यकीन नहीं था कि ये मॉडल भी फिल्म का कोई किरदार निभा सकती है। फिल्म 'क्वीन' मेरे पास मौका था, खुद को साबित करने का और मैंने इसका पूरा लाभ उठाया।
उन्होंने बताया, 'मुझे सिर्फ एक ब्रेक की तलाश थी। 'आयशा' मैं मुझे काम मिला था, लेकिन इसमें मेरा किरदार बहुत छोटा था। इसलिए मैं सही मायनों में 'क्वीन' को अपनी पहली फिल्म मानती हूं।' लिसा ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत साल 2010 में फिल्म 'आयशा' से की थी।
Friday, 1 April 2016
फिल्म रिव्यू: बदली हुई भूमिकाओं में 'की एंड का'
![]() |
| फिल्म रिव्यू: बदली हुई भूमिकाओं में 'की एंड का' |
गृहलक्ष्मी, गृहस्थिन, गृहिणी, गृहस्वामिनी यानी हाउस वाइफ। फिर हाउस हस्बैंड भी कोई शब्द होता है या हो सकता है? इन दिनों पत्र-पत्रिकाओं में एक विचार और अवधारणा के रूप में ऐसे मर्दों (हाउस हस्बैंड) की बात की जाती है, जो घर संभालते हैं, ताकि उनकी बीवियां अपने करियर और शौक पर ध्यान दे सकें। ऐसे मर्दों के लिए हिंदी में अभी तक कोई शब्द प्रचलित नहीं हुआ है। उन्हें गृहविष्णु नहीं कहा जाता। गृहस्वामी शब्द चलन में है, लेकिन वो हाउस हस्बैंड का भावार्थ नहीं हो सकता। फिल्म का नायक कबीर बताता है...'घर संभाले तो की, बाहर जाकर काम करे तो का... अकॉर्डिंग टू हिंदुस्तानी सभ्यता।'
आर बाल्की की फिल्म 'की एंड का' हिंदुस्तानी सभ्यता की इस धारणा का विकल्प पेश करती है और इसी बहाने बदले हुए समाज में स्त्री-पुरुष संबंधों में वर्चस्व के सवाल को छूती है। अगर भूमिकाएं बदल जाएं तो क्या होगा? इस फिल्म में हाउस हस्बैंड बना कबीर तो अपवाद होने की वजह से एक सेलेब्रिटी बन जाता है। कल्पना करें कि अधिकांश पुरुष हाउस हस्बैंड की भूमिका में आ जाएं तो देश-दुनिया की सामाजिक सोच और संरचना में किस तरह के बदलाव आएंगे। आर बाल्की या कोई और निर्देशक भविष्य में ऐसी फिल्म लिख और बना सकता है।
Subscribe to:
Posts (Atom)

