Wednesday, 11 May 2016

डीजल नहीं मिला बाड़ी से पर कमाई हो रही है झाड़ी से

डीजल नहीं मिला बाड़ी से पर कमाई हो रही है झाड़ी से
डीजल नहीं मिला बाड़ी से पर कमाई हो रही है झाड़ी से
लंदन से न खाड़ी से, अब डीजल मिलेगा बाड़ी से, इस नारे के पुरजोर प्रचार के साथ छत्तीसगढ़ में रतनजोत से डीजल बनाने के दावे किए थे, जो अब हवा हो गए हैं। हालत यह है कि राज्य में बड़े पैमाने पर झाड़ी नुमा रतनजोत के तेल देने वाले बीज का उत्पादन हो रहा है, लेकिन यहां उसे कोई पूछने वाला नहीं है। नतीजतन रतनजोत के बीज अब पड़ोसी राज्यों महाराष्ट्र, ओडीशा, मध्यप्रदेश से लेकर राजस्थान तक के व्यापारी खरीद रहे हैं, वहां इनसे तेल निकालकर बायोडीजल बनाया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ में प्राकृतिक रूप से मौजूद रतनजोत का बड़े पैमाने पर उत्पादन करने के लिए सरकार ने करीब 10 साल पहले 3 करोड़ से अधिक पौधे प्रदेश भर में रोपे। इनमें से आधे पौधे बचे हैं, लेकिन इनसे इतनी अधिक मात्रा में बीज निकल रहा है कि इसे यहां के व्यापारियों ने पड़ोस के चार राज्यों में बेचना शुरू कर दिया है। यह धंधा पिछले कई सालों से चल रहा है। राज्य सरकार ने इतने सालों में इस बीज से बायोडीजल बनाने के लिए न तो खुद कोई प्रयास किया और न ही प्राइवेट सेक्टर को यहां प्लांट लगाने के लिए आमंत्रित कर पाई। इस प्रोजेक्ट पर सरकार करोड़ो रूपए फूंक चुकी है।
रतनजोत का पड़ोसी राज्यों में निर्यात करने वाले व्यापारियों के मुताबिक प्रदेश में 30 हजार टन से अधिक मात्रा में रतनजोत का बीज पैदा होता है। चूंकि प्रदेश में केवल एक प्लांट है जिसकी क्षमता 3 टन प्रति दिन है। सरकार इसके लिए केवल 500 टन रतनजोत खरीदती है। बाकी रतनजोत पड़ोस के राज्यों में निर्यात करना पड़ता है।

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