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| श्रीहरि ने किसे दिया था 'सुदर्शन चक्र' |
8 पुराणों मे से एक है 'लिंग पुराण', इस पुराण में भगवान शिव की प्राचीन दिव्य कथाएं समाहित हैं। इस पुराण को 'शैव प्रधान पुराण' भी कहा जाता है। हालांकि 'लिंग' का अर्थ जननेन्द्रिय से है, लेकिन इस पुराम में लिंग का अर्थ ओंकार से संबंधित है।
लिंग पुराण में वैसे तो कई कथाएं हैं लेकिन राजा अम्बरीष की कथा का उल्लेख विशेष रूप से लिया जाता है। राजा अम्बरीष, राजा नाभाग के पुत्र थे। वह विष्णु भक्त थे। वह अपना ज्यादातर वक्त हरि के ध्यान में ही बिताते थे।
राजा बनने के बाद राजा अम्बरीष ने अश्वमेघयज्ञ कर विष्णु जी की पूजा-अर्चना की। उनकी इस भक्ति से प्रसन्न होकर विष्णु जी ने राजा की सुरक्षा के लिए अपने सुदर्शन चक्र को नियुक्त किया। एक बार राजा अम्बरीष ने एक वर्ष तक द्वादशी प्रधान एकादशी व्रत करने का निश्चय किया। और उसे सफलता पूर्वक पूर्ण किया।
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